ईमानदारी (लघुकथा)

 ईमानदारी                      लघुकथा

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        *सड़क* पर मिले रूपये न लौटाकर अनिरूद्ध ने अच्छा किया या बुरा? इस पर तो लंबे समय से बहस जारी है, जबकी उसकी ईमानदारी की लोग क़समें खाते थे। तब क्या उसकी बेरोजगारी ने उससे यह कदम उठवाया? तरह-तरह की बातें चल रही थी। लोग तो ये भी कहते थे कि अनिरूद्ध आज कामयाब है तो उन्हीं सड़क पर मिले पैसों की वजह से। शायद उसे पता चल चूका था कि ये अघोषित संपत्ति है। इन्हें लौटकर थोड़ी शाबाशी और अखबारों में फोटो उसकी बरसों की तंगहाली दूर नहीं कर पायेंगे। कहीं कहीं तो ये भी सुनने में आ रहा था कि कुछ सालों बाद अनिरूद्ध ने रुपयों के मालिक को ढूंढ़कर रूपये सूद समेत लौटा दिये। एक दिलचस्प बात ये भी बताई गयी जो प्रचलन में थी, वह ये कि अनिरूद्ध ने उन रुपयों का इस्तेमाल बिजनेस में किया और जब कामयाब हुआ तो उन रुपयों को वापिस कर दिया। लोग कहते है कि अनिरूद्ध को बैंक ने ॠण देने से मना कर दिया था और अनिरुद्ध को बिजनेस शूरू करने के लिए रुपयों की सख्त आवश्यकता थी, ऐसे में सड़क पर मिले उन रुपयों ने उसकी बहुत मदद की।

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जितेन्द्र शिवहरे इंदौर 

Mo. No. 7746842533

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