स्वरचित रचना आमंत्रण योजना - 2026 *स्वरचित रचना आमंत्रण योजना एवं सम्मान समारोह- 2026* रचना आमंत्रण योजना एवं सम्मान समारोह- 2026 का उद्देश्य - हर आयु वर्ग के अधिक से अधिक कलमकारों को नकद निधि पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित करना तथा अधिकतम कलमकारों का भव्य तथा समृद्ध मंच पर यथोचित सम्मान करना है, जिससे कि स्वरचित नवीन सृजन को बढ़ावा मिलें। रचना आमंत्रण योजना एवं सम्मान समारोह- 2026 हेतु स्वतंत्र विषय पर कविता, कहानी, गीत, व्यंग्य, लघुकथा, संस्मरण, रिपोर्ताज, निबंध, हाईकु, ग़ज़ल, मुक्तक, क़ता, उपन्यास, महाकाव्य, खंडकाव्य, दोहा, चौपाई, सोरठा या अन्य विधा में लिखी स्वरचित रचना आमंत्रित है। नकद निधि पुरस्कार -------------------------- *रचना की प्रत्येक विधा हेतु पहला पुरस्कार 2500/- रूपये नकद निधि + सम्मान पत्र *रचना की प्रत्येक विधा हेतु दूसरा पुरस्कार 1500/- रुपए नकद निधि + सम्मान पत्र *रचना की प्रत्येक विधा हेतु तीसरा पुरस्कार 1000/- नकद राशि निधि + सम्मान पत्र *रचना की प्रत्येक विधा हेतु 500/- नकद राशि निधि के 3 सांत्वना पुरस्कार + सम्मान पत्र *सम्मिलित सभी रचनाकारों को "इंदौर सा...
लव मैरिज- कहानी ---------------------- मृदुला बहुत खुश थी। हायर स्टडी के बाद वह काॅलेज जाने वाली थी। मगर अर्पिता के चेहरे के भाव कुछ और ही बता रहे थे। सौरव भी कुछ इसी चिंता में थे। मृदुला को पैरेन्ट्स का पूरा सपोर्ट है ये उसे पता था लेकिन कुछ तो था जो उसके माता-पिता अपनी बेटी से छिपा रहे है। दोनों उससे कहे भी तो किस मुंह से? जिस बात का डर उन्हें आज सता रहा था कभी उसी डर से उन्होंने अपनों को डराया था। अर्पिता को तब इतनी समझ कहाँ थी और न हीं नई-नई जवानी की दहलीज़ पर कदम रखने वाले सौरव को कुछ समझ थी। फिल्मों की दीवानगी सिर चढ़कर बोल रही थी। बस फिर क्या था, दोनों प्रेम में पड़ गये और अधकच्ची उम्र में ही घर से भाग खड़े हुये। पढ़ाई बीच में छूट गयी। अपने प्यार की जीत पर दोनों इतराने लगे थे। खूब मौज-मस्ती की। फिर जब एक दिन मकान मालिक ने घर का किरारा मांगा तो होश उड़ गये। सिनेमा और सैर-सपाटे में घर से लाया सब कुछ खत्म हो चूका था। सौरव को मजदूरी करने के अलावा कोई काम न मिला। ऊपर से अर्पिता के पैर भारी हो गये। इन सब परेशान...
पुरुषार्थ - कहानी -------------------- अजय का निर्णय स्वागत योग्य था किंतु भाई से बढ़कर अनिरुद्ध के साथ वह ऐसा करेगा किसी ने कभी सोचा नहीं था। नगर में जोरों की चर्चा थी। "इसमें गलत क्या किया?" सुमित्रा तरकारी छाँट रही थी। "लेकिन दोनों की दोस्ती का क्या? और अजय की ज़ुबान थकती नहीं थी राखी को भाभी कहते हुए!" सत्या ने भिंडी तराजू में डाल दी। "अरे! तो अच्छा ही हुआ न! किसी न किसी से तो उसे शादी करना ही थी!" सुमित्रा का जवाब था। आरोपों के साथ अजय भाग भी सकता था मगर ये राखी ही थी जिसके लिए उसने खुद का हौसला बढ़ाएं रखा। अनिरुद्ध के अवसान के इतने सालों बाद भी अजय की दरियादिली छुपाये नहीं छिपी। राखी के लिए उसका समर्पण किसी महान आश्चर्य से कम न था। एक सुधीर ही था जो सब जनता था। चाय की चुस्कियां लेते हुए वह बोला - "पति - पत्नि का स्वांग आखरी कब तक?" राखी के मन की बात सुधीर ही अजय से कह सकता था। उसकी आशा भरी नज़रे यहीं बयां कर रही थी। "अनिरुद्ध सिर्फ़ दोस्त नहीं था। भाई से बढ़कर था।" अजय का घिस...
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