शेर शमशेर शेरनी-कहानी

         

*शेर शमशेर शेरनी-कहानी*

       *श्रीमती* जी के आग्रह पर शाम का भोजन बनाने का जिम्मा न चाहते हुये भी नवीन को स्वीकार करना पड़ा। बहुत ना-नुकूर की। मगर शांति के आगे एक न चली। विद्रोह का अर्थ भावि राजसी ठाठबांठ में बाधक सिद्ध हो सकता था। चारों ओर बंद का माहौल था। बाहर से कुछ मंगवा भी नहीं सकते थे। नवीन हिम्मत कर रसोईघर में घूस गया। कुछ पलों तक सब्जियों को घूरा। फिर विचारों ने आकर उसे घेर लिया। आज खाना बनाया तो निश्चित ही निरंतर सप्ताह में ये अवसर मिलता रहेगा। जो नवीन को नहीं चाहिये था। आटां छन कर थाली में पसर चूका था। नवीन ने मित्र सोमेश को फोन लगाया। जो स्वयं किचन में था। वह कढ़ाई में मसालों की झोंक दे रहा था। सोमेश की प्रसन्नता नवीन से बर्दाश्त नहीं हुई। "सोमेश जैसे पतियों के कारण ही अन्य पतियों को घर का काम करना पड़ता है।" नवीन बड़बड़ा रहा था। आंटा गूंथकर तैयार था। नवीन आगे किसी मित्र को सलाह के लिए फोन करता उससे पुर्व ही अमित का फोन आ गया। वह नवीन से पूछना चाहता था कि टेस्टी पकौड़े बनाने के लिए उसे क्या सावधानी बरतनी चाहिये? नवीन ने बिना कुछ कहे फोन काट दिया। उसके ऑफिस में बाॅस की धाक से सभी कर्मचारी थर्राते थे। नवीन ने आत्मबल प्राप्त करने के लिए उन्हें ही फोन लगा दिया। बाॅस की श्रीमती जी ने फोन उठाया। बाॅस के विषय में पूंछने पर भाभीजी ने कहा कि वो अभी फर्श का पोंछा लगा रहे है। खाना बनाने के बाद ही वे बात करेंगे। नवीन के हौसलें पस्त होने लगे थे। कढ़ाई में सब्जी पकने की सुंगध आने के बाद वह रोटियां बेलने लगा। चावल उबालकर दाल को तड़का मारते हुये नवीन एक अंतिम प्रयास करना चाहता था। उसके मोहल्ले का शेर! संग्राम सिंह। न जाने कितने अपराधिक प्रकरण थे उसके नाम पर। नगर में पुरुषार्थ की एक अलग ही पहचान रखते थे संग्राम सिंह। नेता-अभिनेता सभी खौफ़ खाते थे उनसे। नवीन से अच्छा परिचय था उनका। नवीन ने हिम्मत कर फोन मिला दिया। संग्राम सिंह की बेटी ने फोन उठाया। बात करवाने के सवाल पर बेटी ने कहा- "पापा अभी मम्मी की कमर में आयोडेक्स बाम की मालिश कर रहे है। कुछ देर बाद आपसे बात करेंगे।"

नवीन के मुख पर हवाईय्यां उड़ने लगी। वह चूपचाप भोजन बनाने में तल्लीन नज़र आया।

"शेर हो या शमशेर, शेरनी के आगे बिल्ली बन ही जाता है।" नवीन बड़बड़ा रहा था।

उसकी विनम्रता अब देखते ही बनती थी। नवीन श्रीमती जी को बड़े प्रेम से भोजन परोस रहा था।


समाप्त

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प्रमाणीकरण- कहानी मौलिक रचना होकर अप्रकाशित तथा अप्रसारित है। कहानी प्रकाशनार्थ लेखक की सहर्ष सहमति है।


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जितेन्द्र शिवहरे (लेखक/कवि)

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