मदर्स डे- लघुकथा

मदर्स डे-लघुकथा

सुबह से ही मां के इर्द-गिर्द बच्चों का तांता लगा हुआ था। बूढ़ी आंखें खुशी के मारे बार-बार झलक जाती। बच्चें अपनी मां को तरह-तरह की पोजीशन में उठक- बैठक करवा रहे थे। तीन जवान बेटे और दो विवाहिता बेटियाँ अपनी बूढ़ी मां से लिपटकर-लिपटकर सेल्फी ले रही थीं। बूढ़ी मां को पोते नीतिन ने बताया कि आज मदर्स डे है न! इसलिए सभी उनके साथ फोटो ले रहे है ताकि दुनियां को बता सके कि वे अपनी मां से कितना प्यार करते है।

लेखक-
जितेन्द्र शिवहरे 

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